Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 6 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 6

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 6
Shloka
तपत्यादित्यवच्चैष चक्षूंषि च मनांसि च। न चैनं भुवि शक्नोति कश्चिदप्यभिवीक्षितुम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एष:) जो (आदित्यवत्) सूर्यवत् प्रतापी (मनांसि) सबके बाहर और भीतर मनों को + (तपति) अपने तेज से तपाने हारा है (एनं भुवि) जिसको पृथिवी में (अभिवीक्षितुम्) कड़ी दृष्टि से देखने को (कश्चित् अपि न शक्नोति) कोई भी समर्थ नहीं होता॥६॥