Meaning
इससे सभापति को उचित है कि (नित्यम्) नित्यप्रति (तैः सार्धम) उन राज्यकर्मों में कुशल विद्वान् मन्त्रियों के साथ (सामान्यम्) सामान्य करके किसी से (सन्धि-विग्रहम्) सन्धि = मित्रता, किसी से विग्रह = विरोध, (स्थानम्) स्थित समय को देखकर के चुपचाप रहना, अपने राज्य की रक्षा करके बैठे रहना (समुदयम्) जब अपना उदय अर्थात् वृद्धि हो तब दुष्ट शत्रु पर चढ़ाई करना (गुप्तिम्) मूल राज, सेना, कोश आदि की रक्षा (लब्धप्रशमनानि) जो-जो देश प्राप्त हों उस उस में शान्ति स्थापना, उपद्रवरहित करना (चिन्तयेत्) इन छः गुणों का विचार नित्यप्रति किया करे॥५६॥(स० प्र० षष्ठ समु०)