Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 55 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 55

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/55
Adhyay 7 Shloka 55
Shloka
अपि यत्सुकरं कर्म तदप्येकेन दुष्करम्। विशेषतोऽसहायेन किं तु राज्यं महोदयम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अपि) क्योंकि (विशेषतः असहायेन) विशेष सहाय के बिना (यत् सुकरं कर्म) जो सुगम कर्म है (तत् अपि) वह भी (एकेन दुष्करम्) एक के करने में कठिन हो जाता है (किन्तु) जब ऐसा है तो (महोदयं राज्यम्) महान् राज्य कर्म एक से कैसे हो सकता है ? इसलिए एक को राजा और एक की बुद्धि पर राज्य के कार्य्य को निर्भर रखना बहुत ही बुरा काम है॥५५॥