Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 53 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 53

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 53
Shloka
व्यसनस्य च मृत्योश्च व्यसनं कष्टं उच्यते। व्यसन्यधोऽधो व्रजति स्वर्यात्यव्यसनी मृतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(व्यसनस्य च मृत्योः च) व्यसन और मृत्यु में (व्यसनं कष्टम् उच्यते) व्यसन को ही अधिक कष्टदायक कहा गया है, क्योंकि (व्यसनी) व्यसन में फंसा रहने वाला व्यक्ति (अध: याति) दिन प्रतिदिन दुर्गुणों और कष्टों में गिरता ही जाता है या अवनति को ही प्राप्त होता जाता है, किन्तु (अव्यसनी) व्यसन से रहित व्यक्ति (मृतः) मरकर भी (स्वर्याति) स्वर्गसुख को प्राप्त करता है अर्थात् उसे परजन्म में सुख मिलता है ॥५३॥