Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 51 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 51

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 51
Shloka
दण्डस्य पातनं चैव वाक्पारुष्यार्थदूषणे। क्रोधजेऽपि गणे विद्यात्कष्टं एतत्त्रिकं सदा॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
(यथाक्रमम) क्रम से पूर्व-पूर्व के अधिकाधिक..
Meaning
(च) और (क्रोधजे अपि गणे) क्रोधजो में (दण्डस्य पातनम्) बिना अपराध दण्ड देना (वाक् पारुष्य + अर्थदूष) कठोर वचन बोलना और धन जाकर आदिका अन्याय में खर्च करना (एतत् त्रिकं सदा कष्टं) ये तीन क्रोध से उत्पन्न हुए बड़े दुःखदायक दोष हैं ॥५१॥