Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 49 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 49

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/49
Adhyay 7 Shloka 49
Shloka
द्वयोरप्येतयोर्मूलं यं सर्वे कवयो विदुः। तं यत्नेन जयेल्लोभं तज्जावेतावुभौ गणौ॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
और (एतयो: द्वयोः अपि मूलं यं लोभम्) जो इन कामज और क्रोधज अठारह दोषों के मूल जिस लोभ को (सर्वे कवयः विदुः) सब विद्वान् लोग जानते हैं (तं यत्नेन जयेत्) उसको प्रयत्न से राजा जीते, क्योंकि (तत् + जौ एतौ उभौ गरणौ) लोभ ही से पूर्वोक्त अठारह और अन्य दोष भी बहुत से होते हैं॥४९॥