Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 48 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 48

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 48
Shloka
पैशुन्यं साहसं द्रोह ईर्ष्यासूयार्थदूषणम्। वाग्दण्डजं च पारुष्यं क्रोधजोऽपि गणोऽष्टकः॥

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Meaning
क्रोध से उत्पन्न व्यसनों को गिनाते हैं - (पैशुन्यम्) पैशुन्य अर्थात् चुगली करना (साहसम्) बिना विचारे बलात्कार से किसी स्त्री से बुरा काम करना (द्रोहः) द्रोह रखना (ईर्ष्या) ईर्ष्या अर्थात् दूसरे की बड़ाई वा उन्नति देखकर जला करना (असूया) असूया – दोषों में गुण, गुणों में दोषारोपण करना (अर्थदूषणम्) अर्थ - दूषण अर्थात् अधर्मयुक्त बुरे कामों में धन आदि का व्यय करना (वाग् दण्डजम्) कठोर वचन बोलना और बिना अपराध का कड़ा वचन (च) वा (पारुष्यम्) विशेष दंड देना (अष्टकः क्रोधजः अपि गरणः) ये आठ दुर्ग क्रोध से उत्पन्न होते हैं ॥४८॥