Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 47 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 47

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 47
Shloka
मृगयाक्षो दिवास्वप्नः परिवादः स्त्रियो मदः। तौर्यत्रिकं वृथाट्या च कामजो दशको गणः॥

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1 Bhashyas
Meaning
काम से उत्पन्न हुए व्यसन गिनाते हैं (मृगया) मृगया [ = शिकार] खेलना (अक्ष:) प्रक्ष अर्थात् चोपड़ खेलना, जूना खेलना आदि (दिवास्वप्न:) दिन में सोना (परिवादः) काम कथा वा दूसरे की निंदा किया करना (स्त्रियः) स्त्रियों का प्रति संग (मदः) मादक द्रव्य अर्थात् मद्य, अफीम, भांग, गांजा, चरस आदि का सेवन (तौर्य - त्रिकम्) गाना, बजाना, नाचना व नाच कराना सुनना और देखना [ये तीन बातें] (वृथाट्या) वृथा इधर-उधर घूमते रहना (दशक: कामज: गरणः) ये दश कामोत्पन्न व्यसन हैं ॥४७॥