Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 46 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 46

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 46
Shloka
कामजेषु प्रसक्तो हि व्यसनेषु महीपतिः। वियुज्यतेऽर्थधर्माभ्यां क्रोधजेष्वात्मनैव तु॥

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1 Bhashyas
Meaning
(हि) क्योंकि (महीपतिः) जो राजा (कामजेषु व्यसनेषु प्रसक्तः) काम से उत्पन्न हुए दश दुष्ट व्यसनों में फंसता है (अर्थ-धर्माभ्यां वियुज्यते) वह अर्थ अर्थात् राज्य-धन-आदि और धर्म से रहित हो जाता है । (तु) और (क्रोधजेषु) जो क्रोध से उत्पन्न हुए आठ बुरे व्यसनों में फंसता है (आत्मना एव) वह शरीर से भी रहित हो जाता है ॥४६॥