Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 44 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 44

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 44
Shloka
इन्द्रियाणां जये योगं समातिष्ठेद्दिवानिशम्। जितेन्द्रियो हि शक्नोति वशे स्थापयितुं प्रजाः॥

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1 Bhashyas
Subject
राजा का जितेन्द्रिय होना आवश्यक
Meaning
जब सभासद् और सभापति (इन्द्रियाणां जये समातिष्ठेत्) इन्द्रियों को जीतने अर्थात् अपने वश में रखके सदा धर्म में वर्त और अधर्म से हटे-हटाए रहें, इसलिए (दिवानिशं योगम्) रात-दिन नियत समय में योगाभ्यास भी करते रहें (हि) क्योंकि (जितेन्द्रियः) जो जितेन्द्रिय कि अपनी इन्द्रियों- जो मन, प्राण और शरीर प्रजा है इसको जीते बिना (प्रजाः वशे स्थापयितुं शक्नोति) बाहर की प्रजा को अपने वश में स्थापन करने को समर्थ कभी नहीं हो सकता॥४४॥