Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 4 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 4

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 4
Shloka
इन्द्रानिलयमार्काणां अग्नेश्च वरुणस्य च। चन्द्रवित्तेशयोश्चैव मात्रा निर्हृत्य शाश्वतीः॥

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Meaning
यह सभेश राजा (इन्द्र) इन्द्र अर्थात् विद्युत् के समान शीघ्र ऐश्वर्यकर्ता (अनिल) वायु के समान सबको प्राणवत् प्रिय और हृदय की बात जानने हारा (यंम) यम- पक्षपातरहित न्यायाधीश के समान वर्त्तने वाला (अर्कारणाम्) सूर्य के. समान न्याय धर्म विद्या का प्रकाशक, अंधकार अर्थात् अविद्या अन्याय का निरोधक (अग्ने:) अग्नि के समान दुष्टों को भस्म करने हारा (वरुणस्य) वरुण अर्थात् बांधने वाले के सहश दुष्टों को अनेक प्रकार से बांधने वाला (चन्द्र-वित्तेशयोः) चन्द्र के तुल्य श्रेष्ठ पुरुषों को आनन्ददाता, धनाध्यक्ष के समान कोशों का पूर्ण करने वाला सभापतिं होवे॥४॥