Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 30 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 30

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 30
Shloka
सोऽसहायेन मूढेन लुब्धेनाकृतबुद्धिना। न शक्यो न्यायतो नेतुं सक्तेन विषयेषु च॥

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1 Bhashyas
Meaning
(असहायेन मूढेन) जो राजा उत्तम सहायरहित, मूढ़ (लुब्बेन) लोभी (अकृतबुद्धिना) जिसने ब्रह्मचर्यादि उत्तम कर्मों से विद्या और बुद्धि की उन्नति नहीं की (विनयेषु सक्तेन) जो विषयों में फंसा हुआ है (सः) उससे वह दण्ड (न्यायत: नेतुं न शक्यः) कभी न्यायपूर्वक नहीं चल सकता ॥३०॥