Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 27 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 27

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 27
Shloka
तं राजा प्रणयन्सम्यक्त्रिवर्गेणाभिवर्धते। कामात्मा विषमः क्षुद्रो दण्डेनैव निहन्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तं सम्यक् राजा प्रणयन्) जो दण्ड को अच्छे प्रकार राजा चलाता है (त्रिवर्गेण अभिवर्द्धते) वह धर्म, अर्थ और काम की सिद्धि को बढ़ाता है, और जो (कामात्मा) विषय में लंपट (विषमः) टेढ़ा, ईर्ष्या करने हारा (क्षुद्रः) क्षुद्र नीचबुद्धि न्यायाधीश राजा होता है (दण्डेन एव निहन्यते) वह दण्ड से ही मारा जाता है ॥२७॥