Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 219 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 219

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 219
Shloka
उपेतारं उपेयं च सर्वोपायांश्च कृत्स्नशः। एतत्त्रयं समाश्रित्य प्रयतेतार्थसिद्धये॥

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1 Bhashyas
Meaning
(उपेतारम्) उपेता = प्राप्त करने वाला अर्थात् स्वयं (उपेयम्) उपेय = प्राप्त करने योग्य अर्थात् शत्र, (च) और (सर्व + उपायान्) सब विजय प्राप्त करने के साम, दाम, आदि उपाय (एतत् त्रयम्) इन तीन वातों को (कृत्स्नशः समाश्रित्य) सम्पूर्ण रूप से आश्रय करके अर्थात् विचार करके और अपनी क्षमता देखकर (अर्थ - सिद्धये प्रयतेत) राजा अपने उद्देश्य की सिद्धि के लिए प्रयत्न करे, इन्हें बिना विचारे नहीं ॥२१९॥