Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 212 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 212

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/212
Adhyay 7 Shloka 212
Shloka
हिरण्यभूमिसंप्राप्त्या पार्थिवो न तथैधते। यथा मित्रं ध्रुवं लब्ध्वा कृशं अप्यायतिक्षमम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(पार्थिव:) राजा (हिरण्य-भूमि-सम्प्राप्त्या) सुर्ण और भूमि की प्राप्ति से (तथा न एघते) वैसा नहीं बढ़ता (यथा) कि जैसे (घ्र वम्) निश्चल प्रेमयुक्त (आयतिक्षमम्) भविष्यत् की बातों को सोचने और कार्य सिद्ध करने वाले समर्थ मित्र (अपि कृशम्) अथवा दुर्बल मित्र को भी (लब्ध्वा) प्राप्त होके बढ़ता है ॥२१२॥