Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 211 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 211

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 211
Shloka
पार्ष्णिग्राहं च संप्रेक्ष्य तथाक्रन्दं च मण्डले। मित्रादथाप्यमित्राद्वा यात्राफलं अवाप्नुयात्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(मण्डले) अपने राज्य में (पाणिग्राहम्) पाणिग्रह संज्ञक राजा का [१५६] (तथा) तथा (आक्रन्दं संप्रेक्ष्य) 'आन्द' संज्ञक राजा का [१५६] ध्यान रखके (मित्रात् अथापि अमित्रात्) मित्र अर्थात् पराजित शत्रु से (यात्राफलम् अवाप्नुयात्) युद्धयात्रा का फल प्राप्त करे । अभिप्राय यह है कि अपने पड़ोसी राजाओं से सुरक्षा के लिए या उनको वश में करने के लिए कौन से फल की अधिक उपयोगिता होगी, यह सोचकर शत्रु या मित्र से वही वही फल मुख्यता से प्राप्त करे ॥२११॥