Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 210 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 210

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/210
Adhyay 7 Shloka 210
Shloka
सह वापि व्रजेद्युक्तः संधिं कृत्वा प्रयत्नतः। मित्रं हिरण्यं भूमिं वा संपश्यंस्त्रिविधं फलम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
[यदि पूर्वोक्त कथनानुसार (७ । २०२-२०३) राजा को बन्दी न बनाकर उसके स्थान पर दूसरा राजा न बिठाकर उसे ही राजा रखे तो] (अपि वा) अथवा (सह युक्तः) उसी राजा के साथ मेल करके (प्रयत्नतः सन्धि कृत्वा) बड़ी सावधानी पूर्वक उससे सन्धि करके अर्थात् सन्धिपत्र लिखाकर (मित्रं हिरण्यं वा भूमि त्रिविधं फलं सम्पश्यन्) मित्रता, सोना अथवा भूमि की प्राप्ति होना इन तीन प्रकार के फलों को देखकर अर्थात् इनकी उपलब्धि करके (व्रजेत्) वापिस लौट आये ॥२१०॥