Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 205 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 205

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 205
Shloka
आदानं अप्रियकरं दानं च प्रियकारकम्। अभीप्सितानां अर्थानां काले युक्तं प्रशस्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
क्योंकि (आदानम् अप्रियकर्म) संसार में दूसरे का पदार्थ ग्रहण करना अप्रीति (च) और (दानं प्रियकारकम्) देना प्रीति का कारण है, और (काले युक्तम्) समय पर उचित क्रिया करना (अभीप्सितानाम् अर्थानाम्) उस पराजित के मनोवाञ्छित पदार्थों का देना (प्रशस्यते) बहुत उत्तम है॥२०५॥