Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 196 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 196

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 196
Shloka
उपरुध्यारिं आसीत राष्ट्रं चास्योपपीडयेत्। दूषयेच्चास्य सततं यवसान्नोदकेन्धनम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
किसी समय उचित समझे तो (अरिम् उपरुध्य प्रासीत) शत्रु को चारों ओर से घेरकर रोकरखे (च) और (अस्य राष्ट्रम् उपपीडयेत्) इसके राज्य को पीड़ित कर (अस्य) शत्रु के (यवस- अन्न-उदक-इन्धनम) चारा, अन्न, जल और इन्धन को (सततं दूषयेत्) नष्ट दूषित कर दे ॥१९६॥