Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 195 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 195

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 195
Shloka
प्रहर्षयेद्बलं व्यूह्य तांश्च सम्यक्परीक्षयेत्। चेष्टाश्चैव विजानीयादरीन्योधयतां अपि॥

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1 Bhashyas
Meaning
(व्यूह्य बलं प्रहर्षयेत्) जिस समय युद्ध होता हो तो उस समय लड़ने वालों को उत्साहित और हर्षित करें, जब युद्ध बंद हो जाये तव जिससे शौर्य और युद्ध में उत्साह हो वैसे वक्तृत्वों [ = वचनों] से सबके चित्त को खान-पान, अस्त्र-शस्त्र, सहाय और औषधादि से प्रसन्न रखे, व्यूह के बिना लड़ाई न करे, न करावे + (योधयताम् अपि चेष्टा: विजानीयात्) लड़ती हुई अपनी सेना की चेष्टा को देखा करे कि (सम्यक् परीक्षयेत्) ठीक-ठीक लड़ती है वा कपट रखती है॥१९५॥