Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 189 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 189

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/189
Adhyay 7 Shloka 189
Shloka
यतश्च भयं आशङ्केत्ततो विस्तारयेद्बलम्। पद्मेन चैव व्यूहेन निविशेत सदा स्वयम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
+ (तत् मार्गम्) चढ़ाई करते समय मार्ग में.....
Meaning
(यत: भयम् आशंकेत्) जिधर भय विदित हो (ततः) उसी ओर (बलं विस्तारयेत्) सेना को फैलावे (पद्मन एव व्यूहेन) सब सेना के पतियों को चारों ओर रखके पद्मव्यूह अर्थात् पद्माकार चारों ओर से सेनाओं को रख के (स्वयं निविशेत) मध्य में आप रहे ॥१८९॥