Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 187 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 187

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 187
Shloka
शत्रुसेविनि मित्रे च गूढे युक्ततरो भवेत्। गतप्रत्यागते चैव स हि कष्टतरो रिपुः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(शत्रुसेविनि गूढे मित्रे) जो भीतर से शत्रु से मिला हो और अपने साथ भी ऊपर से मित्रता रखे, गुप्तता से शत्रु को भेद देवे (गत-प्रत्यागते एव) उसके आने जाने में, उससे बात करने में (युक्ततरः भवेन्) अत्यन्त सावधानी रखे (हि) क्योंकि भीतर शत्रु ऊपर मित्र को (कष्टतर: रिपुः) वड़ा शत्रु समझना चाहिए ॥१८७॥