Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 180 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 180

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 180
Shloka
आयत्यां गुणदोषज्ञस्तदात्वे क्षिप्रनिश्चयः। अतीते कार्यशेषज्ञः शत्रुभिर्नाभिभूयते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(आयत्यां गुरदोषज्ञः) जो राजा भविष्यत् अर्थात् आगे करने वाले कर्मों में गुण-दोषों का ज्ञाता (तदात्वे क्षिप्रनिश्चयः) वत्तंनान में तुरन्त निश्चय का कर्ता, और (अतीते कार्यशेषज्ञः) किये हुए कार्यों में शेष कत्तंव्य को जानता है (शत्रुभिः न अभिभूयते) वह शत्रुत्रों से पराजित कभी नहीं होता ॥१८०॥