Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 167 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 167

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 167
Shloka
क्षीणस्य चैव क्रमशो दैवात्पूर्वकृतेन वा। मित्रस्य चानुरोधेन द्विविधं स्मृतं आसनम्॥

Bhashya

Meaning
(क्रमशः) स्वयं किसी प्रकार क्रम से (क्षीरणस्य एव) क्षीण हो जाये अर्थात् निर्बल हो जाये (च) अथवा (मित्रस्य अनुरोधेन) मित्र के रोकने से अपने स्थान में बैठे रहना (द्विविधम् ग्रासनं स्मृतम्) यह दो प्रकार का प्रासन कहता है ॥१६७॥