Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 164 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 164

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 164
Shloka
समानयानकर्मा च विपरीतस्तथैव च। तदा त्वायतिसंयुक्तः संधिर्ज्ञेयो द्विलक्षणः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तदा तु प्रायतिसंयुक्तः) तात्कालिक फल देने वाली और भविष्य में फल देने वाली (सन्धिः द्विलक्षणः ज्ञेयः) सन्धि दो प्रकार की होती है- (१) (समानयानकर्मा) किसी राजा से मेल करके एक साथ शत्रुराजा पर चढ़ाई करना (तथैव) उसी प्रकार दूसरी (विपरीतः) उससे विपरीत अर्थात् किसी राजा से मेल करके अलग-अलग दिशाओं से शत्रुराजा पर आक्रमण करना॥१६४॥