Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 159 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 159

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 159
Shloka
अनन्तरं अरिं विद्यादरिसेविनं एव च। अरेरनन्तरं मित्रं उदासीनं तयोः परम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अनन्तरम्) अपने राज्य के समीपवर्ती राजा को (च) और (अरिसेविनम्) शत्रुराजा की सेवा-सहायता करने वाले राजा को (अर विद्यात्) 'शत्रु' ही समझे (अरे: अनन्तरं मित्रम्) अरि से भिन्न अर्थात् शत्रु से विपरीत आचरण करने वाले अर्थात् सेवा-सहायता करने वाले राजा को 'मित्र' और (तयोः परम्) इन दोनों से भिन्न को (उदासीनम्) जो न सहायता करे न विरोध करे, उसे 'उदासीन' राजा (विद्यात्) समझना चाहिए ॥१५९॥