Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 158 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 158

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 158
Shloka
अमात्यराष्ट्रदुर्गार्थ दण्डाख्याः पञ्च चापराः। प्रत्येकं कथिता ह्येताः संक्षेपेण द्विसप्ततिः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अमात्य - राष्ट्र - दुर्ग- अर्थ-दण्ड-आख्याः) मन्त्री, राष्ट्र, किला, कोश, दण्ड नामक (अपराः पञ्च) और पाँच प्रकृतियां हैं (प्रत्येकं कथिता हि एताः) पूर्वोक्त [१५५-१५६] बारह प्रकृतियों के साथ ये मिलकर अर्थात् पूर्वोक्त प्रत्येक बारहों प्रकृतियों के पांच-पांच भेद होकर इस प्रकार (संक्षेपेण द्विसप्ततिः) संक्षेप से कुल ७२ प्रकृतियां [ = विचारणीय स्थितियां या विषय] हो जाती हैं । १२ पूर्वी और १२ के ५-५ भेद से ६० इस प्रकार १२४५=६०+१२=७२ हैं ॥१५८॥