Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 145 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 145

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 145
Shloka
क्षत्रियस्य परो धर्मः प्राजानां एव पालनम्। निर्दिष्टफलभोक्ता हि राजा धर्मेण युज्यते॥

Bhashya

Meaning
(क्षत्रियस्य) राजाओं का (प्रजानाम् एव पालनम्) प्रजापालन ही करना (पर: धर्म:) परम धर्म है (निर्दिष्टफलभोक्ता हि राजा) और जो मनुस्मृति के सप्तमाध्याय में कर लेना लिखा है और जैसा सभा नियत करे उसका भोक्ता राजा (धर्मेण युज्यते) धर्म से युक्त होकर सुख पाता है, इससे विपरीत दुःख को प्राप्त होता है ॥१४५॥