Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 142 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 142

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 142
Shloka
अमात्यमुख्यं धर्मज्ञं प्राज्ञं दान्तं कुलोद्गतम्। स्थापयेदासने तस्मिन्खिन्नः कार्येक्षणे नृणाम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(नृरणां कार्येक्षणे खिन्नः) प्रजा के कार्यों की देखभाल करने में रुग्णता आदि के कारण अशक्त होने पर (तस्मिन् आसने) उस अपने आसन पर (धर्मज्ञम्) न्यायकारी धर्मज्ञाता (प्राज्ञम्) बुद्धिमान् (दान्तम्) जितेन्द्रिय (कुलोद्गतम्) कुलीन (अमात्यमुख्यम्) प्रधान अमात्य = मन्त्री को (स्थापयेत्) बिठा देवे अर्थात् रुग्णावस्था में प्रधान अमात्य को अपने स्थान की जिम्मेदारी देवे ॥१४२॥