Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 140 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 140

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/140
Adhyay 7 Shloka 140
Shloka
नोच्छिन्द्यादात्मनो मूलं परेषां चातितृष्णया। उच्छिन्दन्ह्यात्मनो मूलं आट्मानं तांश्च पीदयेत्॥

Bhashya

Meaning
(अतितृष्णया) अतिलोभ से (आत्मनः) अपने (परेषां मूलम्) दूसरों के सुख के मूल को (न उच्छिन्द्यात्) उच्छिन्न अर्थात् नष्ट कदापि न करे (हि) क्योंकि जो + (मूलम् उच्छिन्दन्) व्यवहार और सुख के मूल का छेदन करता है वह (आत्मानं च तान् पीडयेत्) अपने और उन को पीड़ा ही देता है ॥१४०॥