Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 14 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 14

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 14
Shloka
तस्यार्थे सर्वभूतानां गोप्तारं धर्मं आत्मजम्। ब्रह्मतेजोमयं दण्डं असृजत्पूर्वं ईश्वरः॥

Bhashya

Meaning
(तस्य अथें) उस राजा के लिए (पूर्वम्) सृष्टि के प्रारम्भ में ही (ईश्वरः) ईश्वर ने (सर्वभूतानां गोप्तारम्) सब प्राणियों की सुरक्षा करने वाले (ब्रह्मतेजोमयम्) ब्रह्मतेजोमय अर्थात् शिक्षाप्रद और अपराधनाशक गुरग वाले (धर्ममात्मजम्) धर्मस्वरूपात्मक (दण्डम् असृजत्) दण्ड[= सजा ] को रचा॥१४॥