Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 128 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 128

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 128
Shloka
क्रयविक्रयं अध्वानं भक्तं च सपरिव्ययम्। योगक्षेमं च संप्रेक्ष्य वणिजो दापयेत्करान्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(क्रय-विक्रयम्) खरीद और विक्री (भक्तम्) भोजन (च) तथा (सपरिव्ययम्) भरण-पोषण का व्यय (च) और (योगक्षेमम्) लाभ (संप्रेक्ष्य) इन सब बातों पर विचार करके (वणिज करान् दापयेत्) राजा को व्यापारी से कर लेने चाहिएं ॥१२८॥