Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 122 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 122

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 122
Shloka
नगरे नगरे चैकं कुर्यात्सर्वार्थचिन्तकम्। उच्चैःस्थानं घोररूपं नक्षत्राणां इव ग्रहम्॥

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1 Bhashyas
Subject
नगरों में राजभवन का निर्मारण
Meaning
बड़े-बड़े नगरों में एक-एक विचार करने वाली सभा का सुन्दर, उच्च और विशाल जैसा कि चन्द्रमा है, वैसा एक-एक घर बनावें । उसमें बड़े-बड़े विद्यावृद्ध कि जिन्होंने विद्या से सब प्रकार की परीक्षा की हो, वे बैठकर विचार किया करें | जिन नियमों से राजा और प्रजा की उन्नति हो वैसे-वैसे नियम और विद्या प्रकाशित किया करें। (स० प्र० षष्ठ समु०) राजा (नगरे नगरे) बड़े-बड़े प्रत्येक नगर में (एकम्) एक-एक (नक्षत्राणां ग्रहम् इव) जैसे नक्षत्रों के बीच में चन्द्रमा है इस प्रकार विशाल और देखने में प्रभावकारी (घोररूपग्र) भयकारी अर्थात् जिसे देखकर या जिसका ध्यान करके प्रजाओं में नियमों के विरुद्ध चलने में भय का अनुभव हो (सर्व + अर्थचिन्तकम्) जिसमें सव राजकार्यों के चिन्तन और व्यवस्था का प्रवन्ध हो ऐसा (उच्चैः स्थानम्) ऊंचा भवन अर्थात् सचिवालय (कुर्यात्) बनावे ॥१२२॥