Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 121 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 121

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/121
Adhyay 7 Shloka 121
Shloka
तेषां ग्राम्याणि कार्यानि पृथक्कार्याणि चैव हि। राज्ञोऽन्यः सचिवः स्निग्धस्तानि पश्येदतन्द्रितः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
और एक-एक, दश दश सहस्र ग्रामों पर दो सभापति वैसे करें जिनमें एक राजसभा में और दूसरा अध्यक्ष आलस्य छोड़कर सब न्यायाधीश आदि राजपुरुषों के कामों को सदा घूमकर देखते रहें । (स० प्र० षष्ठ समु०) (तेषाम्) उन पूर्वोक्त अध्यक्षों [११६ - ११७] के (ग्राम्यारिण कार्यारिण) गांवों से सम्बद्ध राजकार्यों को (च) और (पृथक् कार्यारिण एव हि) अन्य भिन्नभिन्न कार्यों को भी (राज्ञः न्यः स्निग्धः सचिव:) राजा का एक विश्वासपात्र मन्त्री (अतन्द्रितः) आलस्यरहित होकर (पश्येत्) देखे ॥१२१॥