Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 118 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 118

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 118
Shloka
विंशतीशस्तु तत्सर्वं शतेशाय निवेदयेत्। शंसेद्ग्रामशतेशस्तु सहस्रपतये स्वयम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तु) और (विंशतीश:) बोस ग्रामों का अधिपति (तत् सर्वम्) बीस ग्रामों के वर्तमान को [ = बीस ग्रामों की स्थिति को] (शतेशाय निवेदयेत्) शतग्रामाधिपति को नित्यप्रति निवेदन करे (शतेश: तु) वैसे सौ-सौ ग्रामों के पति (स्वयम्) आप (सहस्रपतये) सहस्राधिपति अर्थात् हजार ग्रामों के स्वामी को (शंसेत्) सौ-सौ ग्रामों के वर्तमान को प्रतिदिन जनाया करें ॥११८॥