Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 116 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 116

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 116
Shloka
ग्रामस्याधिपतिं कुर्याद्दशग्रामपतिं तथा। विंशतीशं शतेशं च सहस्रपतिं एव च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
इसी प्रकार प्रबंध करे और आज्ञा देवे कि (ग्रामिकः) वह एक-एक ग्रामों के पति (ग्रामदोषान् समुत्पन्नान्) ग्रामों में नित्यप्रति जो-जो दोष उत्पन्न हों उन उनको (शनकैः स्वयम्) गुप्तता से (ग्रामदशेशाय) दशग्राम के पति को (शंसेत्) विदित कर दे, और (दशेश:) वह दश ग्रामाधिपति उसी प्रकार (विंशति + ईशिने) बीस ग्राम के स्वामी को दशग्रामों का वर्तमान [ = की स्थिति] नित्य प्रति जना देवे ॥११६॥