Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 112 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 112

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 112
Shloka
मोहाद्राजा स्वराष्ट्रं यः कर्षयत्यनवेक्षया। सोऽचिराद्भ्रश्यते राज्याज्जीविताच्च सबान्धवः॥

Bhashya

Meaning
(यः राजा) जो राजा (मोहात् अनवेक्षया) मोह से, अविचार से (स्वराष्ट्र कर्षयति) अपने राज्य को दुर्बल करता है (सः) वह (राज्यात्) राज्य से (च) और (सवान्धवः जीवितात्) बन्धुसहित जीने से पूर्व ही (अचिरात्) शीघ्र (भ्रश्यते) नष्ट-भ्रष्ट हो जाता है ॥११२॥