Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 107 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 107

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/107
Adhyay 7 Shloka 107
Shloka
बकवच्चिन्तयेदर्थान्सिंहवच्च पराक्रमे। वृकवच्चावलुम्पेत शशवच्च विनिष्पतेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(बकवत् अर्थान् चिन्तयेत्) जैसे वगुला ध्यानावस्थित होकर मच्छी के पकड़ने को ताकता है वैसे अर्थसंग्रह का विचार किया करे, द्रव्यादि पदार्थ और बल की वृद्धि कर शत्रु को जीतने के लिए (सिंहवत् पराक्रमेत्) सिंह के समान पराक्रम करे (वृकवत अवलुम्पेत) चीते के समान छिपकर शत्रुओं को पकड़े (च) और समीप में आये बलवान् शत्रुओं से (शशवत् विनिष्पतेत्) सुस्से [= खरगोश] | के समान दूर भाग जाये और पश्चात् उनको छल से पकड़े ॥१०७॥