Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 106 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 106

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/106
Adhyay 7 Shloka 106
Shloka
नास्य छिद्रं परो विद्याद्विद्याच्छिद्रं परस्य च। गूहेत्कूर्म इवाङ्गानि रक्षेद्विवरं आत्मनः॥

Bhashya

Meaning
(परः अस्य छिद्रं न विद्यात्) कोई शत्रु अपने छिद्र अर्थात् निर्बलता को न जान सके (तु) और (परस्य छिद्रं विद्यात्) स्वयं शत्रु के छिद्रों को जानता रहे (कूर्म इव अङ्गानि) जैसे का अपने अंगों को गुप्त रखता है वैसे (आत्मनः विवरं गृहेत् रक्षेत्) शत्रु के प्रवेश करने के छिद्र को गुप्त रखे ॥१०६॥