Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 105 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 105

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 105
Shloka
अमाययैव वर्तेत न कथं चन मायया। बुध्येतारिप्रयुक्तां च मायां नित्यं सुसंवृतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(कथंचन) कदापि (न मायया वर्तेत) किसी के साथ छल से न वर्ते (ग्रमा - यया एवं) किन्तु निष्कपट होकर सबसे बर्ताव रखे (च) और (नित्यं स्वसंवृतः) नित्यप्रति अपनी रक्षा करके (अप्रियुक्तां मायां बुध्येत) शत्रु के किये हुए छल को जान के निवृत्त करे ॥१०५॥