Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 104 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 104

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 104
Shloka
नित्यं उद्यतदण्डस्य कृत्स्नं उद्विजते जगत्। तस्मात्सर्वाणि भूतानि दण्डेनैव प्रसाधयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(नित्यम् उद्यतदण्डस्य) जिस राजा के राज्य में सर्वदा दण्ड के प्रयोग का निश्चय रहता है तो उससे (कृत्स्नं जगत् उद्विजते) सारा जगत् भयभीत रहता है (तस्मात्) इसीलिए (सर्वाणि भूतानि) सत्र प्राणियों को (दण्डेनैव प्रसाधयेत्) दण्ड से साधे अर्थात् दण्ड के भय से अनुशासन में रखे ॥१०४॥