Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 103 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 103

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/103
Adhyay 7 Shloka 103
Shloka
नित्यं उद्यतदण्डः स्यान्नित्यं विवृतपौरुषः। नित्यं संवृतसंवार्यो नित्यं छिद्रानुसार्यरेः॥

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1 Bhashyas
Meaning
राजा (नित्यम् उद्यतदण्ड: स्यात्) सदैव दंड का प्रयोग करने में तत्पर रहे (नित्यं विवृतपौरुषः) सदैव पराक्रम दिखलाने के लिए तैयार रहे (नित्यं संवृतसंवार्यः) सदैव गोपनीय कार्यों को गुप्त रखे (नित्यम् अरे: छिद्रानुसारी) सदैव शत्रु के छिद्रों-कमियों को खोजता रहे ॥१०३॥