Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 102 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 102

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 102
Shloka
अलब्धं इच्छेद्दण्डेन लब्धं रक्षेदवेक्षया। रक्षितं वर्धयेद्वृद्ध्या वृद्धं पात्रेषु निक्षिपेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(दण्डेन अलब्धम् इच्छेत्) दण्ड से प्रप्राप्त की प्राप्ति की इच्छा (अवेक्षया) नित्य देखने से (लब्धं रक्षेत्) प्राप्त की रक्षा (रक्षितं वृद्धया वर्धयेत्) रक्षित की वृद्धि अर्थात् व्याजादि से बढ़ावे (वृद्धम्) और बढ़े हुए धन को पूर्वोक्त [६६] मार्ग में नित्य व्यय करे ० ॥१०२॥