Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 100 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 100

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
7/100
Adhyay 7 Shloka 100
Shloka
अलब्धं चैव लिप्सेत लब्धं रक्षेत्प्रयत्नतः। रक्षितं वर्धयेच्चैव वृद्धं पात्रेषु निक्षिपेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
राजा की चिन्तनीय बातें
Meaning
राजा और राजसभा (अलब्धं च एव लिप्सेत) अलब्ध की प्राप्ति की इच्छा (लब्धं प्रयत्नतः रक्षेत्) प्राप्त की प्रयत्न से रक्षा करे (रक्षितं वर्धयेत्) रक्षित को बढ़ावें (च) और (वृद्धं पात्रेषु निःक्षिपेत्) बढ़े हुए धन को वेदविद्या, धर्म का प्रचार, विद्यार्थी, वेदमार्गोपदेशक तथा असमर्थ अनाथों के पालन में लगावे॥१००॥