Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 1 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 1

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 1
Shloka
राजधर्मान्प्रवक्ष्यामि यथावृत्तो भवेन्नृपः। संभवश्च यथा तस्य सिद्धिश्च परमा यथा॥

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Subject
राजा की उत्पत्ति, व्यवहार एवं सिद्धि
Meaning
अब मनु जी महाराज ऋषियों से कहते हैं कि चारों वर्ण और चारों आश्रमों के व्यवहार कथन के पश्चात् (राजधर्मान् प्रवक्ष्यामि) राजधर्मों को . कहेंगे कि (यथावृत्तः नृपः भवेत्) जिस प्रकार का राजा होना चाहिए (च) और (तस्य यथा संभव:) जैसे उसका संभव = वनना (च) तथा (यथा परमा सिद्धिः) जैसे उसको परमसिद्धि प्राप्त होवे उसको सब प्रकार कहते हैं॥१॥