Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 91 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 91

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 91
Shloka
चतुर्भिरपि चैवैतैर्नित्यं आश्रमिभिर्द्विजैः। दशलक्षणको धर्मः सेवितव्यः प्रयत्नतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एतैः चतुभिः आश्रमिभिः द्विजैः) इसलिए ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासियों को योग्य है कि (प्रयत्नतः) प्रयत्न से (दशलक्षणक: धर्म: सेवितव्यः) दश लक्षणयुक्त निम्नलिखित धर्म का सेवन नित्य करें॥९१॥