Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 89 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 89

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 89
Shloka
सर्वेषां अपि चैतेषां वेदस्मृतिविधानतः। गृहस्थ उच्यते श्रेष्ठः स त्रीनेतान्बिभर्ति हि॥

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Meaning
(वेद-स्मृतिविधानतः) वेदों और स्मृतियों में कहे अनुसार (एषां सर्वेषाम् अपि) इन सब आश्रमों में (गृहस्थः श्रेष्ठ: उच्यते) गृहस्थ सबसे महत्त्वपूर्ण या श्रेष्ठ है (हि) क्योंकि (सः) वह (एतान् त्रीन् विभति) इन तीनों को ही धारण करता है अर्थात् उत्पत्ति और जीवनयापन की दृष्टि से ये तीनों आश्रम गृहस्थाश्रम पर आश्रित हैं॥८९॥