Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 88 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 88

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
6/88
Adhyay 6 Shloka 88
Shloka
सर्वेऽपि क्रमशस्त्वेते यथाशास्त्रं निषेविताः। यथोक्तकारिणं विप्रं नयन्ति परमां गतिम्॥

Bhashya

Meaning
(एते सर्वे अपि क्रमशः यथाशास्त्रं निषेविता:) इन सबका क्रमानुसार शास्त्रोक्त विधानों के अनुसार पालन करने पर (यथोक्तकारिणं विप्रम्) कर्त्तव्यों का यथोक्त विधि से पालन करने वाले द्विज को (परमां गति नयन्ति) उत्तम गति की ओर ले जाते हैं॥८८॥