Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 87 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 87

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 87
Shloka
ब्रह्मचारी गृहस्थश्च वानप्रस्थो यतिस्तथा। एते गृहस्थप्रभवाश्चत्वारः पृथगाश्रमाः॥

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1 Bhashyas
Subject
आश्रम धर्मों के बाद उपसंहार-
Meaning
(ब्रह्मचारी गृहस्थः वानप्रस्थः तथा यतिः) ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ तथा संन्यास (एते चत्वारः पृथक् आश्रमाः) ये चारों अलग-अलग आश्रम (गृहस्थप्रभवः) गृहस्थाश्रम से ही उत्पन्न हुए हैं॥८७॥