Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 85 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 85

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 85
Shloka
अनेन क्रमयोगेन परिव्रजति यो द्विजः। स विधूयेह पाप्मानं परं ब्रह्माधिगच्छति॥

Bhashya

Meaning
(अनेन क्रमयोगेन) इस क्रमानुसार संन्यास-योग से (यः द्विजः परिव्रजति) जो द्विज अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य संन्यास ग्रहण करता है (सः इह) वह इस संसार और शरीर में (पाप्मानं विय) सब पापों को छोड़ छुड़ाके (परं ब्रह्म अधिगच्छति) परब्रह्म को प्राप्त होता है॥८५॥